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पुलेला गोपीचंद: बैडमिंटन एकेडमी खोलने के लिए गिरवी रखा था घर

नई दिल्ली। खेल की दुनिया में ऐसे कम ही खिलाड़ी होते हैं जो मैदान के अंदर जितने सफल होते हैं उतने ही बाहर। बेहतरीन खिलाड़ी भी कम हैं जो बाद में दमदार कोच बने। ऐसे कामयाब कोच की बात करें तो पुलेला गोपीचंद का नाम सबसे ऊपर आएगा। गोपीचंद बैडमिंटन के द्रोणाचार्य हैं जिन्होंने अपने शिष्यों को अर्जुन बनाया। गोपीचंद के दो शिष्यों साइना नेहवाल और पीवी सिंधु ने ब्रोन्ज और सिल्वर ओलंपिक मेडल जीते।
हैदराबाद में बैडमिंटन एकेडमी चलाने वाले गोपीचंद ने पिछले कुछ सालों में भारत को कई बैडमिंटन स्टार दिए हैं। साइना नेहवाल, पीवी सिंधू के अलावा रियो ओलंपिक में क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने वाले किदांबी श्रीकांत, पी कश्यप, गुरुसाई दत्त, तरुण कोना जैसे बैडमिंटन खिलाड़ी उनके शिष्य रहे हैं।
लखनऊ में हुए 'हिन्दुस्तान शिखर समागम-2016' में बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद ने अपने संघर्ष के दिनों का जिक्र करते हुए बताया कि 13 साल पहले उन्हें अपनी एकेडमी खोलने के लिए घर को गिरवी रखना पड़ा। उन्होंने बताया कि आॅल इंग्लैंड जीतने के बाद वो एक ऐसी एकेडमी बनाना चाहते थे जहां खिलाड़ियों को किसी भी तरह की कमी न हो। एकेडमी खोलने के लिए फंड्स की जरूरत थी इसलिए रोज एक कॉपोर्रेट आॅफिस में जाकर प्रेसेंटेशन देते थे कि कैसे उनके स्टूडेंट्स ओलंपिक मेडल जीत सकते हैं। ज्यादातर कॉपोर्रेट कंपनियों ने उन्हें पैसे देने से इंकार कर दिया। यहां तक कि एक कंपनी ने ये तक कह दिया कि बैडमिंटन वर्ल्ड स्पोर्ट बनने के लायख नहीं है। ये बात गोपीचंद के दिल को लग गई, उन्होंने तभी फैसला किया कि वो अब फंड्स के लिए किसी कॉपोर्रेट हाउस नहीं जाएंगे बल्कि अपना घर गिरवी रखेंगे। उन्हें 2003 में आंध्र प्रदेश सरकार ने उन्हें 5 एकड़ जमीन दी थी, लेकिन बावजूद इसके गोपी को अपनी एकेडमी खड़ी करने के लिए 13 करोड़ रुपयों की जरूरत थी। घर गिरवी रखने से उन्हें तीन करोड़ रुपये मिले। इसके अलावा कारोबारी निम्मागड्डा प्रसाद ने उन्हें 5 करोड़ रुपये दिए जिससे उन्हें अपनी एकेडमी को शुरू करने के लिए जरूरत भर के पैसे मिल गए।
सिंधु के सिल्वर मेडल पर कोच गोपी ने कहा कि गुरुदक्षिणा में सिल्वर मेडल काफी खुश हैं। उन्होंने कहा बताया कि सिंधु पहले इतनी अग्रेसिव नहीं थीं। उन्होंने अपने शमीर्ले स्वभाव में जितने बदलाव किए वो कमाल के हैं। सिंधु को चिल्लाना सिखा गया। गोपीचंद ने कहा कि उन्हें देश के सिस्टम से कोई नाराजगी नहीं है। खेलने का मौका मिला वो इससे बहुत खुश हैं।

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