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नडाल, फेरर की चुनौती को तैयार भारतीय टीम

डेविस कप विश्व ग्रुप प्लेआफ मुकाबले आज से
नई दिल्ली। भारत की वर्ष 2011 के बाद पहली बार डेविस कप विश्वग्रुप में पहुंचने की उम्मीदों के सामने स्पेन के दिग्गज खिलाड़ी राफेल नडाल और डेविड फेरर दीवार बनकर खड़े होंगे, लेकिन साथ ही मेजबान टीम के पास भी घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाते हुये बड़ा उलटफेर करने का मौका रहेगा। भारत और स्पेन के बीच यहां आर के खन्ना टेनिस स्टेडियम में 16 से 18 सितंबर तक आयोजित होने वाले डेविस कप विश्व ग्रुप प्लेआफ मुकाबले के लिये स्पेन की मजबूत राष्ट्रीय टीम में नडाल और फेरर को शामिल किया गया है। इनके साथ दो अन्य सदस्य फेलिसियानो लोपेज और मार्क लोपेज भी टीम में शामिल हैं।
स्पेन के चारों ही खिलाड़ी विश्व रैंकिंग के लिहाज से भारतीय खिलाड़ियों से कहीं आगे हैं। नडाल हाल में हुये रियो ओलंपिक खेलों के एकल सेमीफाइनल पहुंचे थे और उन्होंने मार्क लोपेज के साथ पुरूष युगल का स्वर्ण पदक जीता था। हालांकि वर्ष के आखिरी ग्रैंड स्लेम में  यूएस ओपन में नडाल अंतिम 16 दौर में हारकर बाहर हो गये थे। 14 बार के ग्रैंड स्लेम चैंपियन नडाल विश्व रैंकिंग में चौथे नंबर के खिलाड़ी हैं जबकि फेरर की रैंकिंग 13वीं हैं। फेलिसियानो लोपेज की एकल रैंकिंग 26 और युगल रैंकिंग 13 है। मार्क लोपेज युगल रैंकिंग में 19वें नंबर के खिलाड़ी हैं।
दूसरी ओर भारतीय टीम में शामिल साकेत मिनेनी की एकल रैंकिंग 137 और रामकुमार रामनाथन की 203वीं हैं। युगल में लिएंडर पेस 63वीं रैंकिंग पर है जबकि रोहन बोपन्ना चोट के कारण नहीं खेल रहे हैं जो भारत के लिये झटका है। उनकी जगह युवा खिलाड़ी सुमित नागल टूर्नामेंट का हिस्सा हैं जिनकी एकल रैंकिंग 380 और युगल रैंकिंग 693 है।         
भारतीय टीम में मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे पेस ने वर्ष के आखिरी ग्रैंड स्लेम यूएस ओपन में कुछ खास प्रदर्शन नहीं किया था और शुरूआती दौर में ही उनकी चुनौती समाप्त हो गयी थी। वहीं मिनेनी कवालिफाइंग दौर पार कर पहली बार एकल के मुख्य ड्रा में पहुंचे थे और पांच सेट के कड़े मुकाबले में हारे थे। डेविस कप मुकाबले के लिये गत सोमवार को भारत पहुंचने के बाद से ही अभ्यास में जुट गयी नडाल के नेतृत्व वाली स्पेनिश टीम भारत के खिलाफ भी मुकाबले को काफी गंभीरता से ले रही है। मेहमान टीम दिल्ली के गर्म और आद्रता से भरे मौसम में कड़ा अभ्यास कर रही है। पिछले दो वर्षाें में स्पेनिश टीम का डेविस कप में प्रदर्शन खराब रहा है और उनके लिये वापिस विश्व ग्रुप में शामिल होने का यह सुनहरा मौका है।
भारत और स्पेन की मौजूदा टीमों को देखें तो निश्चित ही यह मुकाबला एकतरफा लग रहा है लेकिन इसमें स्पेन के पास खोने के लिये काफी कुछ है। स्पेनिश टीम वर्ष 2014 में जर्मनी के हाथों पहले ही राउंड में 1-4 से हारने के बाद वर्ल्ड ग्रुप से बाहर हो गयी थी। ऐसे में स्पेन ने अपनी सबसे मजबूत टीम को उतारा है ताकि वह अगले वर्ष 16 टीमों के एलीट ग्रुप में वापिस पहुंच सके।
वैसे भारत और स्पेन के बीच डेविस कप में तीन बार भिड़ंत हुई है जिसमें स्पेन 2-1 से आगे है। हालांकि आखिरी बार दोनों टीमें 51 वर्ष पहले इंटरजोनल फाइनल में भिड़ीं थीं। लेकिन भारतीय टीम ने डेविस कप के अपने प्रदर्शन में पहले से काफी सुधार किया है और कोरिया तथा चेक गणराज्य के खिलाफ उसका लाजवाब प्रदर्शन और घरेलू मैदान और घरेलू परिस्थितियों में उसे कमजोर नहीं माना जा सकता है।

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