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लोढ़ा कमेटी : बीसीसीआई पर सुप्रीमकोर्ट का शिकंजा

खातों की जांच के लिए आॅडिटर होगा नियुक्त
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को करारा झटका देते हुए उसके वित्तीय अधिकार सीमित करने और लेनदेन की जांच के लिए स्वतंत्र आॅडिटर नियुक्त करने का शुक्रवार को दिया। मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि बीसीसीआई एक निश्चित सीमा से ऊपर का करार लोढ़ा समिति के अनुमोदन के बिना नहीं कर सकेगा। उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश आर एम लोढा की अध्यक्षता वाली समिति इस सीमा का निर्धारण करेगी।
न्यायालय ने कहा कि निधारित सीमा से अधिक के करार के लिए लोढ़ा समिति से मंजूरी लेनी होगी। लोढ़ा समिति बीसीसीआई के वित्तीय लेनदेन की जांच और निगरानी के लिए स्वतंत्र आॅडिटर भी नियुक्त करेगी। खंडपीठ की ओर से न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने आदेश सुनाते हुए बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को यह निर्देश दिया है कि वह आदेश के अनुपालन के संबंध में दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट लोढा समिति के समक्ष पेश करे।
शीर्ष अदालत ने बीसीसीआई अध्यक्ष को इस आदेश के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट समिति (आईसीसी) के अध्यक्ष शशांक मनोहर को भी अवगत कराने का निर्देश दिया है। उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि बीसीसीआई की वित्तीय स्वतंत्रता पर यह पहरा तब तक रहेगा जब तक कि भारतीय बोर्ड और राज्य क्रिकेट संघ लोढा समिति की सिफारिशों को लागू नहीं करते हैं।
न्यायालय ने पिछली सुनवाई को अंतरिम आदेश सुनाते हुए राज्य क्रिकेट संघों को तब तक राशि नहीं जारी करने का बीसीसीआई को निर्देश दिया था, जब तक वे लोढ़ा समिति की सिफारिशों को मानने का प्रस्ताव पारित नहीं करते। न्यायालय ने कहा था कि जिन राज्य संघों को पैसा जारी किया जा चुका है, वे उसे तब तक खर्च नहीं करेंगे जब तक वे इन सिफारिशों को मान नहीं लेते।
खंडपीठ ने आज के आदेश में भी इस बात का जिक्र करते हुए कहा, राज्य क्रिकेट संघों को एक भी पैसा तब तक नहीं दिया जाएगा, जब तक वे लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर अमल नहीं कर लेते। बोर्ड इस पर अमल के संबंध में दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करे। बोर्ड इस बात को लेकर भी हलफनाम देगा कि वह किस प्रकार से लोढा समिति की सिफारिशों पर अमल करेगा?
इस मामले पर अब अगली सुनवाई पांच दिसंबर को होगी। अदालत के इस आदेश के बाद बीसीसीआई अब राज्य क्रिकेट संघों को ताजा कोष जारी नहीं कर सकेगा, वहीं उसके बड़े करारों पर भी समिति की नजर रहेगी।
बोर्ड का अगला बड़ा करार इंडियन प्रीमियर लीग का प्रसारण अधिकार होगा जिसपर 25 अकटूबर तक कोई फैसला आ सकता है। अदालत ने 17 अक्टूबर को लोढा समिति की स्थिति रिपोर्ट पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और शुक्रवार को उन्होंने इस पर अपना निर्णय सुनाया।
लोढा समिति ने अपनी स्थिति रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारियों को हटाकर प्रशासकों का एक दल नियुक्त किया जाना चाहिये, क्योंकि मौजूदा अधिकारी समिति की सिफारिशों को लागू करने में बाधा डाल रहे हैं। इस पर अदालत ने कहा था कि बीसीसीआई के अधिकारियों को हटाने जैसा कदम आखिरी और सबसे सख्त कदम होगा। अदालत ने न्यायमित्र गोपाल सुबरह्मण्यम से उन उपायों के बारे में पूछा था जिससे कि बोर्ड और उसके राज्य संघ सिफारिशों को लागू कर सकें।
सुबरह्मण्यम का सुझाव था कि जब तक सिफारिशों को लागू न किया जाए तब तक राज्य संघों को दिया जाने वाला धन रोक दिया जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि भविष्य के बीसीसीआई अनुबंध में इस बात को शामिल किया जाए कि लोढा समिति की सिफारिशों का पालन करना अनिवार्य होगा।
उल्लेखनीय है कि बीसीसीआई ने अब तक उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त लोढा समिति की सिफारिशों को पूर्ण रूप से लागू करने में असमर्थता जताई है। बोर्ड का कहना है कि उसके अधिकतर मान्यता प्राप्त क्रिकेट संघ सिफारिशों को लेकर आम सहमति नहीं बना पाए हैं। बीसीसीआई मुख्य रूप से एक राज्य एक वोट और प्रशासकों की उम्र 70 वर्ष तक सीमिति करने और उनके पद पर बने रहने की समय सीमा तय करने जैसी सिफारिशों का विरोध कर रहा है।

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