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इजरायल से माफी मांगी आईएस ने

तेल अवीव। जो लोग इजरायली कमांडोज के इंतकाम की शैली से परिचित हैं, उनके लिए यह खबर चौंकाने वाली नहीं है। विश्वसनीय है। जो लोग आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) को सर्वशक्तिमान मानते हैं, उनके लिए यह खबर चौंकाने वाली है। पूरी तरह अविश्वसनीय है। इजरायल ने दावा किया है कि आईएस ने उसके सैनिकों पर बीते साल नवंबर के हमले के लिए माफी मांगी है। यह हमला आईएस से जुड़े सीरियन गोलान हाइट्स (एसजीएच) ने किया था। यह हमला दक्षिण-पश्चिमी सीरिया में किया गया था। जिस इलाके में हमले की वारदात हुई, वहां इजरायल ने सन 1967 में कब्जा कर उसे अपना भू-भाग बना लिया था। हालांकि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने उस जगह पर इजरायल के कब्जे को आज तक मान्यता नहीं दी है। नवंबर के हमले से ठीक पहले इजरायली सेना ने वहां सीरिया के आतंकी संगठन खालिद इब्न अल-वालिद पर हमला कर चार आतंकियों को ढेर कर दिया था। खालिद इब्न अल-वालिद ने बाद में खुद को आईएस से जोड़ दिया था। अब इजरायल के पूर्व रक्षा मंत्री मोशे याअलोन ने कहा है कि इस हमले के लिए आईएस ने माफी मांगी है। हालांकि माफी मांगने के तरीके पर पूर्व मंत्री ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इजरायली सेना ने भी इस बारे में कुछ नहीं कहा है। इससे पहले आईएस के कब्जे वाले इलाके से बचकर आने वाले एक पत्रकार ने भी इसी तरह की बात कही थी। उसका दावा है कि आईएस सारी दुनिया में केवल इजरायल से डरता है। क्योंकि आतंकी संगठन का मानना है कि इस देश की मजबूत सेना का मुकाबला कर पाना नामुमकिन है। गौरतलब है कि इजरायल अपने नागरिकों तथा संपत्ति की हिफाजत के लिए बेहद संवेदनशील है। इस देश के लिए यह प्रसिद्ध है कि उसके किसी नागरिक या प्रतिष्ठान पर हमले के दोषी को जिंदा नहीं छोड़ा गया। यह देश पूरे धैर्य के साथ अपने एक-एक दोषी को मौत के घाट उतारने की नीति पर अब तक सफलतापूर्वक चलता आया है।

इजरायल से माफी मांगी आईएस ने
डेस्क तेल अवीव। जो लोग इजरायली कमांडोज के इंतकाम की शैली से परिचित हैं, उनके लिए यह खबर चौंकाने वाली नहीं है। विश्वसनीय है। जो लोग आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) को सर्वशक्तिमान मानते हैं, उनके लिए यह खबर चौंकाने वाली है। पूरी तरह अविश्वसनीय है। इजरायल ने दावा किया है कि आईएस ने उसके सैनिकों पर बीते साल नवंबर के हमले के लिए माफी मांगी है। यह हमला आईएस से जुड़े सीरियन गोलान हाइट्स (एसजीएच) ने किया था। यह हमला दक्षिण-पश्चिमी सीरिया में किया गया था। जिस इलाके में हमले की वारदात हुई, वहां इजरायल ने सन 1967 में कब्जा कर उसे अपना भू-भाग बना लिया था। हालांकि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने उस जगह पर इजरायल के कब्जे को आज तक मान्यता नहीं दी है। नवंबर के हमले से ठीक पहले इजरायली सेना ने वहां सीरिया के आतंकी संगठन खालिद इब्न अल-वालिद पर हमला कर चार आतंकियों को ढेर कर दिया था। खालिद इब्न अल-वालिद ने बाद में खुद को आईएस से जोड़ दिया था। अब इजरायल के पूर्व रक्षा मंत्री मोशे याअलोन ने कहा है कि इस हमले के लिए आईएस ने माफी मांगी है। हालांकि माफी मांगने के तरीके पर पूर्व मंत्री ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इजरायली सेना ने भी इस बारे में कुछ नहीं कहा है। इससे पहले आईएस के कब्जे वाले इलाके से बचकर आने वाले एक पत्रकार ने भी इसी तरह की बात कही थी। उसका दावा है कि आईएस सारी दुनिया में केवल इजरायल से डरता है। क्योंकि आतंकी संगठन का मानना है कि इस देश की मजबूत सेना का मुकाबला कर पाना नामुमकिन है। गौरतलब है कि इजरायल अपने नागरिकों तथा संपत्ति की हिफाजत के लिए बेहद संवेदनशील है। इस देश के लिए यह प्रसिद्ध है कि उसके किसी नागरिक या प्रतिष्ठान पर हमले के दोषी को जिंदा नहीं छोड़ा गया। यह देश पूरे धैर्य के साथ अपने एक-एक दोषी को मौत के घाट उतारने की नीति पर अब तक सफलतापूर्वक चलता आया है।

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