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खेल की जांच में खेल पर जताई चिंता

नई दिल्ली। संसद की एक समिति ने राष्ट्रमंडल खेल से जुड़ी अनियमितता के मामले में गिरफ्तार किये गये पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी के तीन सहयोगियों के संबंध में सीबीआई द्वारा 60 दिनों में आरोपपत्र दायर नहीं करने के कारण उन्हें जमानत पर छोड़े जाने पर चिंता व्यक्त की है।
    समिति ने यह भी जानना चाहा है कि क्या अदालत ने उन 18 मामलों को बंद करने के संबंध में सीबीआई की समाप्ति (क्लोजर) रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। उन्नीसवां राष्ट्रमंडल खेल 2010 पर केवी थामस के नेतृत्व वाली लोक लेखा समिति (पीएसी) की रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति यह नोट करती है कि सीबीआई ने विभिन्न स्रोतों से प्राप्त शिकायतों के अधार पर राष्ट्रमंडल खेलों से संबंधित 33 मामले दर्ज किये। समिति ने कहा कि कुल दर्ज मामलों में से 15 मामले आयोजन समिति के विरुद्ध दर्ज किये गए, पांच मामले एनडीएमसी, चार-चार मामले डीडीए और पीडब्ल्यूडी, दो मामले सीपीडब्ल्यूडी और एक-एक मामला एमटीएनएल, प्रसार भारती और एमसीडी के विरुद्ध दर्ज किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, ‘जहां तक सीबीआई जांच के अंतर्गत कवर किये गए मामलों का प्रश्न है तो समिति यह पाती है कि वे खरीद संविदाओं, निर्माण, पारमर्श, भर्ती और सुविधाओं के उपयोग से संबंधित मामले हैं। विशेषकर आयोजन समिति के विरुद्ध मामलों के संबंध में समिति नोट करती है कि सीबीआई ने खेल अधिव्यय, कार्यबल, माल बिक्री, समाचार सेवा, संविदाओं के साथ साथ मानार्थ टिकटों से संबंधित मामले दर्ज किए हैं। जहां तक जांच एजेंसी द्वारा की गई प्रगति का संबंध है, समिति पाती है कि साक्ष्य के अभाव में 11 मामलों में समाप्ति रिपोर्ट दाखिल कर दी गई जबकि 18 मामले अभी भी जांच के विभिन्न चारणों में है। यह विश्वास करते हुए कि सीबीआई शीघ्र ही जांच के अधीन शेष 18 मामलों को उनकी अंतिम परिणति तक ले जायेगी, समिति यह जानना चाहती है कि क्या न्यायालय ने सीबीआई द्वारा दाखिल समाप्ति रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है और यदि नहीं तो ब्यूरो द्वारा आगे क्या कार्रवाई करने का विचार है?’  रिपोर्ट में कहा गया है, ‘समिति सभी मंत्रालयों का ध्यान अपनी सिफारिशों की ओर आकर्षित करती है, जिसमें सीबीआई द्वारा जिम्मेदार पाये गए अधिकारियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।’
    आरोपपत्र दाखिल किये जाने में विलंब के बारे में समिति ने एक विशेष मामले, जिसमें कलमाड़ी के तीन सहयोगियों के संबंध में सीबीआई द्वारा 60 दिनों में आरोपपत्र दायर नहीं करने के कारण जमानत पर छोड़ दिया गया, पर चिंता जताई।

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