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भारत-वेस्टइंडीज ट्वंटी20 सीरीज

पहला मैच 27 अगस्त को फ्लोरिडा के लाडरहिल मैदान में होगा
फ्लोरिडा। वेस्टइंडीज में विराट कोहली की कप्तानी में टेस्ट सीरीज फतह करने के बाद अब भारतीय क्रिकेट टीम अमेरिका में वेस्टइंडीज के खिलाफ दो ट्वंटी 20 मैचों की सीरीज के लिये उतरने जा रही हैं जहां विश्व चैंपियन टीम के खिलाफ जीत दिलाने की जिम्मेदारी इस बार महेंद्र सिंह धोनी के कंधों पर रहेगी। भारत और वेस्टइंडीज के बीच फ्लोरिडा में दो ट्वंटी 20 मैचों की सीरीज कराने का मकसद मुख्य रूप से अमेरिका में क्रिकेट को बढ़ावा देना भी है तो वहीं यह सीरीज दोनों टीमों के लिये भी अहम होने वाली है जहां धोनी लंबे अर्से बाद भारतीय टीम का नेतृत्व करेंगे तो वहीं कार्लोस ब्रेथवेट भी पहली बार वेस्टइंडीज टीम की कप्तानी संभालेंगे।
फ्लोरिडा के सेंट्रल ब्रोवार्ड रीजनल पार्क में सीरीज के दो ट्वंटी 20 मैच आयोजित किये जाएंगे जो यहां होने वाली दूसरी अंतर्राष्ट्रीय सीरीज है। इससे पहले वर्ष 2010 में यहां न्यूजीलैंड और श्रीलंका के बीच दो ट्वंटी 20 मैच खेले गये थे। हालांकि वेस्टइंडीज टीम को यहां खेलने का फायदा मिल सकता है जो कैरेबियाई प्रीमियर लीग के करीब छह मैच यहां खेल चुकी है।
लॉडरहिल में 27 और 28 अगस्त को होने वाले मैचों के लिये बुधवार को भारतीय टीम अमेरिका पहुंची थी जिसकी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने ट्विटर पर जानकारी भी दी। टीम इंडिया अब सीरीज से पहले खुद को यहां की परिस्थितियों में ढालने से पूर्व गुरूवार को अभ्यास के लिये उतरेगी। खेल के सबसे लंबे प्रारूप टेस्ट से सीधे खुद को सबसे छोटे ट्वंटी 20 प्रारूप में ढालना निश्चित ही एक बड़ी चुनौती रहेगी।
टेस्ट सीरीज में भले ही वेस्टइंडीज को अपनी ही जमीन पर हार का मुंह देखना पड़ा था लेकिन कैरेबियाई टीम ने इसी वर्ष भारत की मेजबानी में हुये ट्वंटी 20 विश्वकप में खिताब जीता था और वह एक बार फिर धोनी एंड कंपनी के लिये इस प्रारूप में चुनौती साबित हो सकती है। अमेरिका में भारतीय मूल के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं और ऐसे में टीम इंडिया के लिये व्यापक समर्थन के साथ बेहतर प्रदर्शन का दबाव भी रहेगा।
वहीं वेस्टइंडीज टीम को चैंपियन बनाने वाले कप्तान डैरेन सैमी को न सिर्फ कप्तानी से हटा दिया गया है बल्कि वह टीम का भी हिस्सा नहीं होंगे। लेकिन विश्वकप में अपने लगातार चार छक्कों से मैच जिताने वाले ब्रेथवेट बड़ा खतरा हो सकते हैं। ब्रेथवेट अपने पसंदीदा प्रारूप में कप्तानी करने को लेकर उत्साहित हैं और टेस्ट में हार की शर्मिंदगी से टीम को उबारना चाहते हैं।
उन्होंने कहा वेस्टइंडीज की टीम की अगुवाई करने में उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी और उन्हें खिलाड़ियों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करना होगा। सैमी के बाद कुर्सी संभालने वाले ब्रेथवेट अपनी कप्तानी में टीम को सफलता दिलाना चाहते हैं और धोनी के लिये यह बड़ी चुनौती साबित हो सकती है जो काफी समय के बाद अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में लौट रहे हैं।
वैसे भारतीय टीम के पास बेहतरीन खिलाड़ियों की कमी नहीं है और टेस्ट सीरीज जीतने के बाद उसका आत्मविश्वास भी काफी ऊंचा है। विराट कोहली, शिखर धवन, रोहित शर्मा, रविचंद्रन अश्विन जैसे खिलाड़ियों के लिये प्रारूप में अचानक से बदलाव कुछ चुनौतीपूर्ण हो सकता है लेकिन वे सभी अच्छी फार्म में हैं और ऐसे में भारतीय टीम का पलड़ा भी बराबर ही कहा जा सकता है।
भारत ने हाल ही में आस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ ट्वंटी 20 में अच्छा प्रदर्शन किया है जबकि जून में जिम्बाबवे के खिलाफ उसने 2-1 से सीरीज जीती थी। भारत की 14 सदस्यीय टीम में सबसे बड़ा बदलाव केवल कप्तानी का रहेगा जिसमें इस बार नेतृत्व विराट के बजाय धोनी के पास रहेगा और टीम इंडिया के पास विश्वकप सेमीफाइनल में मिली हार का वेस्टइंडीज से बदला लेने का मौका भी रहेगा।

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