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फाइनल के दबाव से मुक्त रहकर रचा इतिहास: पार्थिव पटेल

इंदौर। रिकार्ड 41 बार के चैम्पियन मुंबई को हराकर रणजी ट्राफी टूर्नमेंट का पहला खिताब जीतने वाली गुजरात टीम के कप्तान पार्थिव पटेल ने कहा कि उनके खिलाड़ी रणनीति के मुताबिक काफी हद तक दबाव में नहीं आए और इसलिए रणजी फाइनल में 312 रन के अब तक के सबसे बड़े लक्ष्य को हासिल कर इतिहास रचने में सफल रहे।
पटेल ने यहां होलकर स्टेडियम में गुजरात की मुंबई पर पांच विकेट से ऐतिहासिक विजय के बाद संवाददाताओं से कहा, हमने पहले ही तय कर लिया था कि हम मुंबई के खिलाफ खिताबी मुकाबले के दबाव में नहीं खेलेंगे। हमने इस फैसले पर काफी हद तक अमल किया। हालांकि, जब हम जीत से केवल 10..15 रन दूर थे, तब थोड़ा-सा स्वाभाविक दबाव महसूस हो रहा था।
31 वर्षीय क्रिकेटर ने कहा, मैच के आखिरी दिन 300 से ज्यादा रन के लक्ष्य का पीछा करना किसी भी टीम के लिए आसान नहीं होता, लेकिन हमें पूरा भरोसा था कि हम रणजी ट्राफी टूर्नमेंट जीत सकते हैं। मुझे काफी खुशी है कि हमने इस लक्ष्य को हासिल कर नया रिकार्ड बनाया। मुंबई जैसी मजबूत टीम के खिलाफ गुजरात की खिताबी जीत में खुद पटेल की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने 196 गेंदों पर 24 चौकों की मदद से 143 रन की धमाकेदार पारी खेलकर अपनी टीम को राष्ट्रीय चैम्पियन बनाया।
उन्होंने कहा, यह मेरे करियर की सबसे अच्छी पारियों में से एक है। जब हमने तीन विकेट जल्दी गंवा दिए तो मैंने पैंतरा बदला और आक्रामक रूप से खेलकर जवाबी हमला शुरू कर दिया। पटले शॉर्ट पिच गेंद पर गेंदबाज को कैच थमाकर आउट हो गए, जब गुजरात लक्ष्य से केवल 13 रन दूर था। क्या गुजरात के कप्तान को मलाल है कि काश, वह अपनी टीम की ऐतिहासिक जीत के वक्त बल्लेबाज के रूप में क्रीज पर मौजूद होते, इस सवाल पर उन्होंने कहा, ह्यबल्लेबाज का आउट होना खेल का हिस्सा है। मेरे लिए मेरी टीम की जीत ज्यादा जरूरी है।
पिछले 3 साल के दौरान गुजरात के प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार के बारे में पूछे जाने पर पटेल ने कहा, हम सत्र से पहले बहुत सारे अभ्यास मैच खेलते हैं और मुकाबलों के लिए तैयार हो जाते हैं, जब हम टीम चयन के लिए बैठते हैं, तो हमारी बैठक 5 मिनट से ज्यादा नहीं चलती, क्योंकि खिलाड़ियों के ताजा प्रदर्शन के मद्देनजर हमें टीम चुनने में जरा भी दिक्कत नहीं होती। उन्होंने कहा कि जूनियर क्रिकेट पर विशेष ध्यान केंद्रित किए जाने से आज गुजरात की प्रतिभाएं अंडर-19 से लेकर सीनियर स्तर तक की टीमों में भारत की नुमाइंदगी कर रही हैं। इसका गुजरात टीम को खासा फायदा मिला है।

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