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इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल 2017 सीजन के बाद चैम्पियंस ट्रॉफी को खत्म करने की तैयारी में

नयी दिल्ली। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) 2017 सीजन के बाद चैम्पियंस ट्रॉफी को खत्म कर सकता है। इसकी जगह पर 2019 से वनडे लीग की शुरुआत हो सकती है। चैम्पियंस ट्रॉफी को 2013 सीजन के बाद ही खत्म किया जाना था लेकिन इंग्लैंड में इसकी जबरदस्त सफलता ने आईसीसी को इसे बनाए रखने पर मजबूर कर दिया। चैम्पियंस ट्रॉफी का आयोजन अगले साल वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप की जगह पर किया जाएगा।

अब जबकि दुनिया भर के 13 देशों में अलग-अलग लीग शुरू हो गए हैं, लिहाजा चैम्पियंस ट्रॉफी के लिए आईसीसी को समय निकालना मुश्किल हो रहा है। चैम्पियंस ट्रॉफी हालांकि हमेशा से एक सफल आयोजन रहा है। इसके तहत 18 दिनों में कुल 15 मैच खेले जाते हैं।

टीम इंडिया को मिला नया कोच

टेलेंट, समर्पण और बेमिसाल का पर्याय हैं अनिल कुंबले
भारतीय क्रिकेटर और दिग्गज स्पिनर रहे अनिल कुंबले टीम इंडिया के नए मुख्य कोच बनाए गए हैं। धर्मशाला में बीसीसीआई के वार्षिक कॉनक्लेव के बीच बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने प्रेस वार्ता कर टीम इंडिया के मुख्य कोच के पद पर अनिल कुंबले की नियुक्ति की घोषणा करते हुए सारे सस्पेंस खत्म कर दिए। सही मायने में देखा जाए तो टेलेंट, खेल के प्रति समर्पण और क्रिकेट के बेमिसाल नगीने हैं अनिल कुंबले। कुंबले के जीवन से जुड़ी कुछ खास घटनाएं, क्यों हैं कुम्बले अहम और कुछ ऐसे फैक्ट्स जो आप नहीं जानते होंगे जानिए एलएन स्टार के जरिए।
:- 45 साल के कुंबले अपने दो दशक लंबे करियर में भारत के लिए 132 टेस्ट मैच और 271 वनडे खेल चुके हैं।

द्रविड़ की ना से बने कुंबले कोच
बीसीसीआई के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने नए कोच के नाम का ऐलान करते वक्त कहा कि उन्होंने पहले इस पद के लिए राहुल द्रविड़ से बात की थी। उन्होंने कहा, मैंने राहुल द्रविड़ से टीम इंडिया का मुख्य कोच बनने के लिए अनुरोध किया था। उन्होंने इसके लिए ना नहीं कहा, लेकिन उनका कहना था कि वह जूनियर टीम के साथ काम करना चाहते हैं।

कौन होगा सपोर्टिंग स्टाफ में

बल्लेबाजी कोच: ऐसी खबरें आई हैं कि टीम इंडिया के डायरेक्टर रह चुके रवि शास्त्री टीम इंडिया के नए बैटिंग कोच बन सकते हैं। फिलहाल यह जिम्मेदारी संजय बांगड़ के कंधों पर थी।
गेंदबाजी कोच: इस पद के लिए वेंकेटेश प्रसाद एक विकल्प हो सकते हैं। वेंकेटेश प्रसाद ने हेड कोच के लिए आवेदन भरा था। इसके अलावा वो सचिन तेंदुलकर और अनिल कुंबले दोनों के साथ खेल भी चुके हैं। प्रसाद 2007 में टीम इंडिया के गेंदबाजी कोच रह चुके हैं। आपको बता दें कि क्रिकेट सलाहकार समिति ने ही कुंबले को कोच चुना है। इस समिति में सौरव गांगुली, सचिन तेंदुलकर और वीवीएस लक्ष्मण शामिल हैं। भरत अरुण पिछले कुछ समय से टीम इंडिया के गेंदबाजी कोच रहे हैं।
फील्डिंग कोच: जिम्बाब्वे दौरे के लिए घरेलू क्रिकेटर अभय शर्मा को फील्डिंग कोच बनाया गया था। ऐसी भी खबरें आई हैं कि वो इस पद पर बने रह सकते हैं।
इनका कहना है
मैं बहुत उत्सुक हूं - कोहली
भारत के टेस्ट कप्तान विराट कोहली ने अनिल कुंबले की नए मुख्य कोच पद पर नियुक्ति का स्वागत किया और कहा कि वह इस महान लेग स्पिनर के साथ काम करने को लेकर उत्सुक हैं।
भारतीय क्रिकेट के अच्छे दिन आएंगे : गावस्कर
पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने अनिल कुंबले की भारत के मुख्य कोच पद पर नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय क्रिकेट के लिए अब अच्छे दिन आने वाले हैं।
कुंबले अपने जमाने के दिग्गज क्रिकेटर रहे हैं लेकिन उन्हें कोचिंग का अनुभव नहीं है। गावस्कर ने हालांकि कहा कि कुंबले मुख्य कोच पद के लिये सही पसंद हैं।
गावस्कर ने कुंबले की एक साल के लिये नियुक्ति के तुरंत बाद कहा कि आपको कोचिंग की डिग्री की जरूरत नहीं होती है आपका अच्छा मानव प्रबंधक होना जरूरी है। कुंबले भारतीय कोच के तौर पर टीम से बहुत सारी प्रतिबद्धता, अनुभव और बुद्धिमता जोड़ेगा। भारतीय कोच के रूप में एक साल काफी होता है।
गावस्कर ने कहा कि कई अन्य कोचों से इतर कुंबले टीम के साथ सक्रिय तौर पर शामिल रहेंगे और खिलाड़ियों को उनसे काफी कुछ सीखने को मिलेगा।
उन्होंने कहा कि खिलाड़ी गूगल पर कुंबले को सर्च करके जान सकते हैं उन्होंने क्या हासिल किया है। उन्हें ड्रेसिंग रूम में काफी सम्मान हासिल था। वह भारत के बेहतरीन खिलाड़ी थे।
इस पूर्व कप्तान ने कहा कि आखिर में मैदान पर खिलाड़ियों को प्रदर्शन करना है लेकिन कुंबले बाहर से सक्रिय तौर पर उनके साथ शामिल रहेंगे। उन्होंने कहा, कुंबले निश्चित तौर पर अपनी राय देंगे। मुझे नहीं लगता कि वे निष्क्रिय कोच रहेंगे। जहां तक उपलब्धियों की बात हैं तो वे खिलाड़ियों के सामने जीवंत उदाहरण होंगे।

कुंबले के जीवन के कुछ दिलचस्प वाकये

टूटे जबड़े के साथ लारा का विकेट लिया
अनिल कुंबले को एंटिगा में जबड़े पर गेंद लगी थी, इसके बावजूद वो खेलने के लिए मैदान पर आए थे। उस वक्त उनका जबड़ा टूट गया था।
एक भारतीय डॉक्टर उस मैच के दौरान वहां स्टेडियम में मौजूद थे और मैच देख रहे थे। उन्हें बड़ी मुश्किल से ढूंढा गया। उन्होंने कुंबले के जबड़े को एक पट्टी से बांध दिया था। सबको लग रहा था कि कुंबले आराम करेंगे।
लेकिन यह कुंबले का जज़्बा ही था कि वे गेंदबाजी करने के लिए मैदान में उतर गए। टूटे हुए जबड़े के साथ गेंदबाजी करते हुए उन्होंने ब्रायन लारा का विकेट लिया। वाकई में यह एक यादगार लम्हा था।
नहीं खेलने के बावजूद जीत की तस्वीर ली
त्रिनिदाद एंड टोबैगो की राजधानी पोर्ट आॅफ स्पेन में भारत का मैच हो रहा था। उस वक्त जॉन राइट भारतीय क्रिकेट टीम के कोच और सौरव गांगुली कप्तान थे।
कुंबले को पहले कहा गया कि वो मैच में खेल रहे हैं, फिर कहा गया कि वो नहीं खेल रहे हैं, फिर दोबारा से कहा गया कि खेल रहे हैं।
वो जिंक का पेंट लगाकर मैदान का चक्कर काट रहे थे। आखिरकार जब टीम की घोषणा हुई तो उसमें कुंबले का नाम नहीं था।
एक सीनियर खिलाड़ी के साथ इस तरह का बर्ताव हुआ, लेकिन जब भारत टेस्ट मैच जीत गया तो सबसे अधिक खुश जो खिलाड़ी था वो थे अनिल कुंबले। उस वक्त वो अपने कैमरे से पूरी टीम की खुशी मनाते हुए फोटो खींच रहे थे।

कभी मैच रेफरी ने बुलाया नहीं
जब एक बार कुंबले की कप्तानी में भारतीय टीम आॅस्ट्रेलियाई दौरे पर थी उस वक्त भारी विवाद हुआ था। उस वक्त उन्होंने कहा था कि 'एक ही टीम क्रिकेट खेल रही है।'
उनका मतलब था कि आॅस्ट्रेलिया जिस तरह के पैंतरे अपना रही है वो खेल भावना के खिलाफ हैं। उस वक्त भारत ने जबरदस्त तरीके से सिरीज में वापसी की थी। उसमें कुंबले की बड़ी भूमिका थी।
कुंबले बहुत अनुशासन के साथ क्रिकेट खेलते थे। मुझे याद नहीं कि कुंबले को कभी किसी मैच रेफरी ने अपने पास बुलाया हो।

हिम्मत नहीं हुई खराब खेलने को कहने की
मैच फिक्सिंग के दौर में कुंबले ने अपने क्रिकेट जीवन का बेस्ट परफारमेंस दिया है। शायद लगता था कि वो इसे एक चुनौती के तौर पर देखते हो। उन्हें लगता था कि वे मैच जिता कर आरोप लगाने वालों को चुप करा सकते हैं। उनका चरित्र इतना मजबूत है कि मुझे नहीं लगता कि किसी की हिम्मत हुई होगी कि वो कुंबले के पास जाकर खराब खेलने के लिए कह सकें।

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