मध्य प्रदेश

इस दोस्त को कहीं देखा है क्या? स्याहगोश की खोज के लिए शुरू हुआ अभियान

भोपाल/उज्जैन (हि.स.)। वन विभाग के उज्जैन सर्किल और एमपी टाइगर फाउंडेशन सोसायटी मिलकर उज्जैन संभाग के  राजस्थान से लगे जिलों में एक अनूठा अभियान चला रहे हैं। इस दोस्त को कहीं देखा है क्या? शीर्षक वाला यह अभियान स्याहगोश की खोज और संरक्षण के लिए है, जो अब प्रदेश में काफी कम दिखाई देता है। अभियान को शुरू हुए काफी कम समय हुआ है, लेकिन प्रदेश के पश्चिमी अंचल के युवा और छात्र-छात्राएं और ग्रामीण इसके प्रति काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। 

वन विभाग और टाइगर फाउंडेशन ने 22 फरवरी को गांधीसागर पक्षी अभ्यारण्य से एक नए और अनूठे अभियान की शुरुआत की है। यह अभियान स्याहगोश की खोज और संरक्षण के लिए है, जो अब प्रदेश में बहुत कम दिखाई देता है। इस अभियान में संबंधित क्षेत्र के युवा काफी बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं और ये उत्साही युवा अब तक अभियान के नोडल ऑफीसर को कई ऐसी तस्वीरें भेज चुके हैं, जो स्याहगोश से मिलती-जुलती हैं। हालांकि तस्वीरों की जांच से पता चला है कि ये स्याहगोश की नहीं हैं। 

ऐसा होता है ये दोस्त

स्याहगोश बिल्ली प्रजाति का जीव है। इसकी ऊंचाई 40 से 45 सेंटीमीटर और लंबाई 70 से 105 सेंटीमीटर के बीच होती है। इसका वजन 8 से 18 किलोग्राम तक होता है। इसके कान बड़े होते हैं और उनके सिरे पर लंबे बालों का एक गुच्छा होता है। इसकी विशेषता यह है कि यह छलांग मारकर पक्षियों को पकड़ लेता है। यह घास मैदानों, झाड़ियों और छोटे पेड़ों वाले खुले क्षेत्रों, पठारों में पाया जाता है। छोटे आकार का यह जीव पर्यावरण संतुलन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है, जो फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले छोटे प्राणियों और पक्षियों को नियंत्रित रखता है। 

पन्ना में दिखा था अंतिम बार

देश के अन्य हिस्सों में स्याहगोश अभी भी पाया जाता है, लेकिन मध्यप्रदेश में इसे अंतिम बार करीब 20 साल पहले पन्ना क्षेत्र में देखा गया था। कुछ साल पहले पन्ना क्षेत्र में इसकी खोज के लिए एक वैज्ञानिक अध्ययन भी किया गया था, लेकिन इसकी उपस्थिति के कोई साक्ष्य नहीं मिले। जिस तरह का पर्यावरण स्याहगोश के लिए उपयुक्त होता है, वह राजस्थान से लगे प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में मिलता है। इसीलिए इस अभियान के लिए प्रदेश के राजस्थान से लगे जिलों को चुना गया है। 

गांव-गांव दे रहे जानकारी

डीएफओ मंदसौर मयंक चांदीवाल ने शनिवार को इस अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि सबसे पहले हमने इसके लिए अपने स्टाफ को ट्रेंड किया। स्टाफ के लोगों को स्याहगोश और लोगों से संपर्क करने के तरीके बताए गए। इसके बाद अब विभाग के कर्मचारी गांव-गांव जाते हैं। वे लोगों को स्याहगोश की तस्वीरें दिखाते हैं, वो कैसा होता है यह समझाते हैं और उनसे आग्रह करते हैं कि यदि इस तरह का कोई प्राणी दिखाई दे, तो तुरंत वन विभाग के अमले को सूचना दें। उन्होंने बताया कि लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए स्याहगोश की जानकारी वाले पोस्टर भी लगाए जा रहे हैं। 

ग्वालियर अंचल में भी शुरू होगा अभियान

विभागीय अधिकारियों के अनुसार फिलहाल यह अभियान उज्जैन सर्किल के मंदसौर, नीमच, शाजापुर, रतलाम और उज्जैन जिलों में शुरू किया गया है। संभवत: अप्रैल माह के पहले सप्ताह में इसे ग्वालियर अंचल के उन जिलों में लांच कर दिया जाएगा, जो राजस्थान से लगते हैं। इस क्षेत्र का पर्यावरण भी स्याहगोश के अनुकूल है।