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हार्दिक: दुम निकली, फंसा हुआ है हाथी अब भी

 अहमदाबाद। गुजरात में पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौरान पाटीदार अनामत समिति (पास) के नेताओं पर दर्ज आपराधिक प्रकरणों को लेकर दो परस्पर सर्वथा विरोधाभासी तथ्य नजर आ रहे हैं। अधिकांश कार्यकर्ताओं के लिए इस मामले में ह्यहाथी निकल गया, बस दुम अटकी हैह्ण वाली स्थिति है। दूसरी ओर ह्यपासह्ण के मुख्य संयोजक हार्दिक पटेल के साथ इससे ठीक उलट ह्यदुम निकल गई, हाथी तो फंसा हुआ है अब भीह्ण वाले हालात हैं। दरअसल, बुधवार को गुजरात सरकार के निर्देश पर हार्दिक पटेल के खिलाफ दो साल पहले राजकोट में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच क्रिकेट मैच के मौके पर विरोध प्रदर्शन के दौरान तिरंगे के कथित अपमान के लिए दायर एक मुकदमे को वापस ले लिया गया। यानी दुम निकल गई।

उपमुख्यमंत्री नीतिन पटेल ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि पिछले माह पाटीदार समुदाय के प्रतिनिधियों जिनमें स्वयं हार्दिक भी शामिल थे, के साथ सरकार की बैठक में इस बात पर सहमति बनी थी कि पाटीदार आंदोलन से जुडेÞ सभी गैर गंभीर किस्म के मुकदमे तथा जिन्हें वापस लेने का अधिकार राज्य सरकार के पास हो, को चरणबद्ध तरीके से वापस ले लिया जायेगा। यह निर्णय उसी के तहत लिया गया है। राजकोट कलेक्टर ने गृह विभाग के निर्देश पर संबंधित आदेश जारी किया है। आंदोलन से जुड़े दो अन्य मामले भी वापस लिये गये हैं। अन्य मामलों की भी समीक्षा हो रही है।

ज्ञातव्य है कि हार्दिक ने अपने आंदोलन के प्रचार के लिए उक्त एकदिवसीय मैच का इस्तेमाल करने की घोषणा कर रखी थी। वह मैदान में प्रवेश के लिए किसान जैसा वेश बदल कर जब स्टेडियम से कुछ दूरी पर थे तभी पुलिस ने उन्हे जब रोकने की कोशिश की तो वह अपनी कार की छत पर चढ़ कर तिरंगे को उल्टा लहराने लगे। इस संबंध में पडधरी थाने में मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था हालांकि बाद में अदालत ने जमानत दे दी थी।

उपमुख्यमंत्री पटेल ने इस फैसले को दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव से जोड़ कर नहीं देखने की बात कही। उधर पास के प्रवक्ता वरूण पटेल ने इस फैसले का स्वागत किया तथा कहा कि आंदोलन से जुडे सभी मामले वापस होने चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा भी पाटीदार समुदाय के हित में ठोस फैसले लेगी तो उसे समर्थन दिया जा सकता है।

अब हाथी वाली बात। ज्ञातव्य है कि हार्दिक के खिलाफ आंदोलन से जुडे कई मामले दायर है जिनमें सबसे गंभीर राजद्रोह के दो मुकदमे है। इस सिलसिले में वह नौ माह तक जेल में भी रह चुके हैं। राज्य सरकार ने इसकी वापसी को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया है। सरकार यह कह चुकी है कि यदि हार्दिक भविष्य में आंदोलन के दौरान हिंसा न होने का आश्वासन दें तो उनसे राष्ट्रद्रोह का मुकदमा हटाने की सिफारिश की जा सकती है।