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मुस्लिम दो-फाड़, कांग्रेस ने किया किनारा

लखनऊ/अहमदाबाद। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं वकील कपिल सिब्बल की स्थिति विचित्र दिख रही है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अयोध्या मामले की सुनवाई आगामी आम चुनाव के बाद करने का आग्रह किया था। उनकी इस कोशिश पर खुद मुस्लिम समाज दो हिस्सों में बंट गया है।

इधर, कांग्रेस ने सिब्बल के इस कदम से किनारा करते हुए कहा है कि इस मसले पर न्यायालय का फैसला जल्दी से जल्दी आना चाहिए।

सिब्बल अयोध्या के मंदिर-मस्जिद विवाद में प्रमुख पक्षकार सेन्ट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील हैं। बोर्ड से जुड़े और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी तथा उच्चतम न्यायालय में बोर्ड की ओर से वकील मुश्ताक अहमद सिददीकी ने सिब्बल के रुख का समर्थन किया, जबकि मामले से जुड़े और अयोध्या में विवादित धर्मस्थल और उसके आसपास अधिग्रहीत परिसर के निकट रहने वाले हाजी महबूब ने सिब्बल की दलील को नकार दिया।

जिलानी और अहमद का कहना था कि यह सही है कि इस विवाद की सुनवाई शुरू होते ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके समर्थक संगठन साम्प्रदायिकता फैलाना शुरू कर देंगे। समाज में तनाव का माहौल बन सकता है, लेकिन इसके उलट महबूब ने कहा कि विवाद जल्द समाप्त होना चाहिये। इसके लिये न्यायालय में प्रतिदिन सुनवाई जरूरी है।

बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाजी महबूब ने कहा कि सिब्बल का बयान उचित नहीं हैं। उनका कहना था कि सिब्बल बोर्ड के वकील हैं, लेकिन वह एक राजनीतिक दल से भी जुड़े हुए हैं। न्यायालय में दिया गया उनके बयान से वह सहमत नहीं हैं। इस मसले का जल्द से जल्द समाधान होना चाहिये।

इधर, सिब्बल की दलील पर उठे विवाद के बीच कांग्रेस ने आज कहा कि वह चाहती है कि इस मामले में न्यायालय का फैसला जल्द से जल्द आये। कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप ंिसह सूरजेवाला ने अहमदाबाद में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अयोध्या मामले पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई चल रही है और उनकी पार्टी इस पर जल्द से जल्द फैसले के पक्ष में है।

आपसी बातचीत से इसके समाधान के प्रयास विफल हो गये हैं और अब फैसला न्यायालय को ही करना है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पिछले 42 महीने के अपने शासनकाल में अयोध्या मामले की जल्द सुनवाई को लेकर कोई कदम नहीं उठाया। सरकार की जवाबदेही बनती है कि वह इसकी जल्द सुनवाई सुनिश्चित करे। उसे काफी पहले इस मामले में त्वरित सुनवाई के लिए पहल करनी चाहिए थी।

सिब्बल के न्यायालय से इस मामले की सुनवाई में देर करने के अनुरोध के बारे में पूछे जाने पर सुरजेवाला ने कहा कि न्यायालय व्यक्ति विशेष के कहने से प्रभावित नहीं होता। वकील अपने मुवक्किल की तरफ से दलीलें देते रहते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े वकील विभिन्न मामलों में अदालतों में क्या-क्या बातें कहते रहे हैं इसकी लंबी फेहरिस्त बनाई जा सकती है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा राम के नाम पर राजनीति कर रही है जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि यह पार्टी राम के नाम पर मंथरा की भूमिका निभा रही है। कांग्रेस के लिए राम राज्य का मतलब सभी धर्मों के प्रति सम्मान, सदाचार और संस्कृति से है, जबकि भाजपा इसके नाम पर धु्रवीकरण की राजनीति कर रही है तथा लोगों को बांट रही है।

मोदी ने लपका मुद्दा
इधर, गुजरात के धंधुका में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सिब्बल की दलील पर कड़ा ऐतराज जताते हुए आज कहा कि चुनावी लाभ के लिए महत्वपूर्ण मामलों को लटकाये रखनी वाली कांग्रेस इसे सिब्बल का निजी विचार क्यों बता रही है।

मोदी ने यहां एक चुनावी सभा में कहा कि भाजपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले तीन तलाक के विषय पर अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखा जबकि लोग यह समझ रहे थे राज्य मे बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता होने के चलते उनकी सरकार चुनावी नुकसान की आशंका से ऐसा नहीं करेगी। पर पार्टी ने इसकी परवाह नहीं की।

राजीव गांधी के समय से ही लटके इस मामले का निराकरण करोड़ो मुस्लिम बहनों की तकलीफों को ध्यान में रख कर किया गया। अब ऐसा करने वाले को कड़ी सजा वाले कानून की पहल भी की जा रही है।

उन्होंने कहा कि सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम समाज के लिए वकालत करें, बाबरी मस्जिद के पक्ष में वकालत करें और दलीलें पेश करें तो यह उनका अधिकार है। पर सुनवाई को या राममंदिर को लोकसभा चुनाव से जोड़ने का क्या तुक है। इसका हक उन्हें किसने दिया है। कांग्रेस कहती है कि यह उनका निजी विचार है तो वह यह बताये कि क्या चुनाव वक्फ बोर्ड लडता है कि कांग्रेस लड़ती है।