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‘भविष्य की समस्या बन सकते हैं रोहिंग्या शरणार्थी’, बांग्लादेश ने कहा- इन्हें म्यांमार ही दे अपनी नागरिकता

नई दिल्ली, एजेंसी। भारत में एक धड़े द्वारा किए जा रहे रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन के बीच बांग्लादेश ने चेताया है कि बड़ी संख्या में इन शरणार्थियों को पनाह दिए जाने से संबंधित क्षेत्र में समस्याएं पैदा हो सकती हैं।  गौरतलब है कि भारत सरकार भी अवैध रोहिंग्या मुसलमानों को यहां से बाहर करने पर सख्त रुख अपनाए हुए है। दूसरी ओर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण इन्हें भारत में रखे जाने का समर्थन कर रहे हैं। भूषण ने इस बारे में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर कर रखी है।

इस विवाद के बीच शुक्रवार को बांग्लादेश के विदेश सचिव शहीदुल हक ने कहा कि बड़े पैमाने पर रोहिंग्या लोगों का दूसरे देशों में शरण लेना फिलहाल एक मानवीय संकट है, लेकिन बाद में यह क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है।  हक ने कहा कि उन्होंने अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल के साथ मुलाकात के दौरान रोहिंग्या संकट के सभी पहलुओं पर भी चर्चा की। उन्होंने म्यांमार के रखाइन प्रांत में हो रही हिंसा को नस्ली सफाया करार देते हुए कहा कि भारत और बांग्लादेश का मानना है कि म्यांमार को रोहिंग्या लोगों को नागरिकता दे देनी चाहिए।

बांग्लादेशी विदेश सचिव ने कहा कि शरणार्थी संकट क्षेत्र में अस्थिरता उत्पन्न कर सकता है। उन्होंने कहा कि हालांकि फिलहाल ऐसा नहीं लग रहा लेकिन भविष्य में ऐसा होने की पूरी आशंका है। इस संकट की शुरूआत म्यांमार से हुई है और इसका समाधान भी वहीं निकालना होगा।उन्होंने कहा कि बांग्लादेश और म्यांमार ने इस समस्या के समाधान के लिए संयुक्त कार्य समूह का गठन किया है। रोहिंग्या लोगों को एक प्रक्रिया के तहत उनके देश वापस भेजा जाना चाहिए और इसमें अंतरराष्ट्रीय समूूहों को शामिल किया जाना चाहिए।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों को चरमपंथ के चश्मे से देखने की प्रवृत्ति बन गयी है लेकिन इससे इस बात की अनदेखी हो जाती है कि यह एक मानवीय संकट है जिसके कारण बड़ी संख्या में वे महिलाएं और बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं जिन्हें मदद की अत्यधिक जरूरत है।